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    July 20, 2024

    ND vs PAK Live Streaming: एशिया कप में आज भारत-पाकिस्तान आमने-सामने, इस चैनल पर देखें

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    एनएसओ के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर (सकल मूल्यवर्धन-जीवीए) चालू वित्त वर्ष की जून तिमाही में 3.5 फीसदी रही। 2022-23 की समान तिमाही में यह 2.4 फीसदी रही था। वित्तीय, रियल एस्टेट व पेशेवर सेवाओं की वृद्धि दर 2022-23 की पहली तिमाही के 8.5 फीसदी से बढ़कर 12.2 फीसदी पहुंच गई।
    देश की जीडीपी की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून अवधि में पिछली चार तिमाहियों में सबसे तेज रही। इसकी वजह कृषि व वित्तीय क्षेत्र का बेहतर प्रदर्शन है। इसके साथ ही भारत ऊंची वृद्धि दर हासिल करने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है। इससे भारतीय बाजार में वैश्विक निवेशकों का भरोसा और बढ़ेगा। साथ ही, निवेश आकर्षित करने में भी मदद मिलेगी।
    राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) के बृहस्पतिवार के आंकड़ों के मुताबिक, कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर (सकल मूल्यवर्धन-जीवीए) चालू वित्त वर्ष की जून तिमाही में 3.5 फीसदी रही। 2022-23 की समान तिमाही में यह 2.4 फीसदी रही था। वित्तीय, रियल एस्टेट व पेशेवर सेवाओं की वृद्धि दर 2022-23 की पहली तिमाही के 8.5 फीसदी से बढ़कर 12.2 फीसदी पहुंच गई। हालांकि, विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर पहली तिमाही में घटकर 4.7 फीसदी रह गई। एक साल पहले की समान अवधि में यह 6.1 फीसदी रही था। खनन एवं उत्खनन क्षेत्र में जीवीए भी 9.5 फीसदी से घटकर 5.8 फीसदी रह गया।

    बिजली, गैस, जलापूर्ति व अन्य जनकेंद्रित उपयोगी सेवाओं में जीवीए 2.9 फीसदी रहा, जो एक साल पहले 14.9 फीसदी था। निर्माण क्षेत्र में जीवीए भी 16 फीसदी के मुकाबले घटकर 7.9 फीसदी रह गया। एनएसओ दूसरी तिमाही के लिए जीडीपी का 30 नवंबर, 2023 को जारी करेगा।

    मौजूदा मूल्य पर अर्थव्यवस्था में 8.02 फीसदी की बढ़ोतरी
    मौजूदा मूल्य पर जीडीपी (नॉमिनल जीडीपी) 2023-24 की पहली तिमाही में 8.02 फीसदी बढ़कर 70.67 लाख करोड़ रुपये रही। 2022-23 की समान तिमाही में जीडीपी का आकार 65.42 लाख करोड़ रुपये रहा था, जो सालाना आधार पर 27.7 फीसदी की वृद्धि को दर्शाता है। वास्तविक या स्थिर मूल्य (2011-12) पर जीडीपी का आकार चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8% बढ़कर 40.37 लाख करोड़ रुपये पहुंच सकता है। एक साल पहले की समान तिमाही में इसका आकार 13.1% वृद्धि के साथ 37.44 लाख करोड़ रुपये रहा था।

    राजकोषीय घाटा : बढ़कर 33.9 फीसदी पर पहुंचा
    चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीने में केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा बढ़कर पूरे साल के लक्ष्य के 33.9 फीसदी पर पहुंच गया। एक साल पहले की समान अवधि में यह 20.5 फीसदी था। लेखा महानियंत्रक (सीजीए) के मुताबिक, अप्रैल-जुलाई तक राजकोषीय घाटा वास्तविक संदर्भ में 6.06 लाख करोड़ रुपये रहा। सरकार ने 2023-24 के बजट में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 5.9 फीसदी तक लाने का लक्ष्य रखा है। 2022-23 में यह जीडीपी का 6.4 फीसदी रहा था, जबकि शुरुआती अनुमान 6.71 फीसदी का था।

    सीजीए ने कहा, अप्रैल-जुलाई में शुद्ध कर राजस्व 5.83 लाख करोड़ रहा। यह पूरे वित्त वर्ष के बजट अनुमान का 25% है। एक साल पहले की समान अवधि में शुद्ध कर राजस्व संग्रह 34.4 फीसदी था। चार महीने में केंद्र का कुल खर्च 13.81 लाख करोड़ रुपये रहा। यह बजट अनुमान का 30.7 फीसदी है, जो एक साल पहले 28.6 फीसदी था। कुल खर्च में 10.64 लाख करोड़ राजस्व खाते और 3.17 लाख करोड़ पूंजी खाते से जुड़े हैं।

    …पर अनुमान से कम रही बढ़त

    एजेंसी विकास दर
    इंडिया रेटिंग्स 7.9 फीसदी
    आरबीआई 8.0 फीसदी
    बैंक ऑफ बड़ौदा 8-8.2 फीसदी
    क्रिसिल 8.2 फीसदी
    एसबीआई 8.3 फीसदी
    इक्रा 8.5 फीसदी

    प्रमुख देशों को भारत से ईर्ष्या करने पर मजबूर करेगा आंकड़ा
    एसोचैम के महासचिव दीपक सूद ने कहा कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था को चलाने में एक बड़ी ताकत बन गया है। 2023-24 की पहली तिमाही में 7.8% की वास्तविक वृद्धि दर निश्चित रूप से दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को भारत से ईर्ष्या करने पर मजबूर कर देगी। वह भी तब, जब ये देश महंगाई और अन्य चुनौतियों से जूझ रहे हैं।

    सीईए बोले…बारिश कम होने पर भी 6.5% रहेगी वृद्धि दर
    मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने बृहस्पतिवार को कहा, मानसूनी बारिश कम रहने के बावजूद चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर 6.5 फीसदी रहेगी। जीडीपी आंकड़े जारी होने के बाद उन्होंने कहा, सामान्य तौर पर आर्थिक गतिविधियां तेज हैं। फिर भी, 6.5 फीसदी की वृद्धि दर को लेकर जोखिम दोनों तरफ बराबर है। कच्चे तेल के दाम में तेजी, वैश्विक स्तर पर लंबे समय तक अनिश्चितता और तंग वित्तीय स्थिति जैसे हालात वृद्धि के लिए जोखिम हैं। सीईए ने कहा, बेकाबू महंगाई को लेकर चिंता की जरूरत नहीं है। सरकार व आरबीआई दोनों आपूर्ति बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित रखने को कदम उठा रहे हैं। नई फसल आने के साथ खाद्य महंगाई में नरमी आने की उम्मीद है।

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