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    July 17, 2024

    क्वांटम कम्युनिकेशन के क्षेत्र में भारत का बड़ा धमाका, आईआईटी दिल्ली ने 380 किलोमीटर तक फाइबर केबल से भेजा सिग्नल।

    1 min read

    ISRO ने 300 मीटर दूर तक इस Technology द्वारा Data सुरक्षित भेजने में सफलता पाई थी , और अब IIT दिल्ली में 380 किलोमीटर का विश्व रिकॉर्ड बना दिया है।
    भारत टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नित नए प्रतिमान दर्ज करता जा रहा है , भारत को वैसे ही इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी का विश्वगुरु माना जाता है , और इस बार भारत ने एक उभरते हुए क्षेत्र क्वांटम कम्युनिकेशन में एक ऐसा कारनामा किया है , कि पूरी दुनिया चकित हो गयी है , IIT दिल्ली के शोधकर्ताओं ने एक trusted-node-free सिक्योर क्वांटम कम्युनिकेशन सिस्टम बना लिया है , जिसके द्वारा 380 किलोमीटर दूर तक फाइबर केबल द्वारा सिग्नल्स भेजे जा सकते है , आपको यह जानकार हैरानी हो सकती है , कि इतनी दूरी तक इस प्रकार का Communication करने का यह एक विश्व रिकॉर्ड है , आज के डिजिटल युग में जहां डाटा ही सबसे महत्वपूर्ण होता है, ऐसे में डाटा की सुरक्षा बहुत बड़ा मुद्दा है , यह किसी भी व्यक्ति, कंपनी या सरकार के लिए बहुत बड़ी समस्या भी है , क्यूंकि डाटा चोरी होने या नष्ट होने से कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं , इसका हल है क्वांटम कम्युनिकेशन।

    क्वांटम कंप्यूटिंग और क्वांटम कम्युनिकेशन

    क्वांटम कंप्यूटिंग एक मॉडर्न टेक्नोलॉजी है , इस टेक्नोलॉजी से लैस कंप्यूटर का इस्तेमाल कई समस्याओं के समाधान के लिए किया जाता है , इन कंप्यूटर को तेज स्पीड से काम करने के लिए बनाया जाता है , क्वांटम कंप्यूटर काफी तेजी से डेटा को प्रोसेस करते हैं , इस प्रौद्योगिकी में एन्क्रिप्शन कुंजी को फाइबर ऑप्टिक केबल के जरिये क्यूबिट के रूप में भेजा जाता है , क्वांटम कंप्यूटिंग में इन क्यूबिट का बुनियादी स्रोत के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है , यह ठीक उसी तरह है जैसे सामान्य कंप्यूटिंग में बुनियादी स्रोत के रूप में बाइट का इस्तेमाल होता है , इसे ‘क्वांटम क्रिप्टोग्राफी’ भी कहा जाता है जिसमें डाटा को प्रकाश कणों (Photons) में बदल कर सुरक्षित तरीके से भेजा जाता , इसमें फाइबर का इस्तेमाल होता है, इसलिए इसकी गति जबरदस्त होती है, और साथ ही इस data को हैक करना, चोरी करना या नष्ट करना लगभग असंभव होता है , कैसे काम करता है क्वांटम कम्युनिकेशन।

    क्वांटम Key Distribution के जरिये संदेश, फोटो या वीडियो Photons में बदल दिया जाता है. फिर इन्हें एक जगह से दूसरी जगह विशेष ट्रांसमीटर के माध्यम से भेजा जाता है, जिसे खास तरह का रिसीवर ही प्राप्त कर सकता है , अगर बीच में कोई हैकर इन संदेशो को हैक करके का प्रयास भी करे (जो लगभग असम्भव है) तो इन Qubits की state बदल जायेगी, और सन्देश भेजने वाले को इस हरकत का पता लग जायेगा , आज के पारंपरिक कंप्यूटर बाइनरी 0 और 1 अवस्थाओं के रूप में जानकारी संग्रहीत करते हैं, क्वांटम कंप्यूटर क्वांटम बिट्स का उपयोग करके गणना करने के लिये प्रकृति के मूलभूत नियमों पर आधारित होते हैं , बिट के विपरीत जो कि 0 या 1 क्यूबिट अवस्थाओं के संयोजन में हो सकता है , इसके विपरीत क्वांटम बड़ी गणना की अनुमति देता है और उन्हें जटिल समस्याओं को हल करने की क्षमता देता है जो कि सबसे शक्तिशाली पारंपरिक सुपर कंप्यूटर भी सक्षम नहीं हैं।

    भारत इस टेक्नोलॉजी पर कुछ वर्षों से शोध कर रहा था।

    दो साल पहले ISRO ने 300 मीटर दूर तक इस Technology द्वारा Data सुरक्षित भेजने में सफलता पाई थी , और अब IIT दिल्ली में 380 किलोमीटर का विश्व रिकॉर्ड बना दिया है , भारत के पहले क्वांटम कंप्यूटिंग बेस्ड टेलीकॉम नेटवर्क सिस्टम को C-DoT ने डेवलप किया है , इसके एनक्रिप्शन को तोडना लगभग असंभव है , भारत सरकार ने इसी साल इस टेक्नोलॉजी का उपयोग कर के संचार भवन और एनआईसी के बीच सुरक्षित संचार की सुविधा शुरू भी कर दी है , इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हम सरकारी आंकड़ों, वित्तीय आंकड़ों, रक्षा और व्यापार के डाटा, संवेदनशील डाटा और Individual user data को सुरक्षित रखने में कर सकते है , तेज़ी से बढ़ते एआई और क्वांटम कंप्यूटिक की एक अन्य तकनीक के रूप में , एक दौड़ में शामिल होने और नेतृत्व की स्थिति हासिल करने के लिये विश्व स्तर पर देशों और कंपनियों के मध्य एक जोश पैदा कर दिया है , फिलहाल जरूरी है और समय की आवश्यकता भी कि पर्याप्त मात्रा में कम्प्यूटेशनल क्षमता का निर्माण, व्यावहारिक आकार और सस्ती लागत वाले क्वांटम कंप्यूटर के निर्माण और संचालन में कौशल विकसित करना, अलग तरह के व्यावहारिक प्रयोगों को साकार करने के लिए अनुसंधान जारी रखा जाए. इसके साथ ही स्नातक में शैक्षिक पाठ्यक्रमों में सामग्री पेश करना और विश्वविद्यालय स्तर पर क्वांटम विज्ञान और इंजीनियरिंग को एक विषय के रूप में विकसित करने की भी जरूरत है , इससे स्नातकोत्तर और शोध के स्तर पर बड़ी संख्या में विज्ञान और प्रौद्योगिकी से कौशलयुक्त मानव संसाधन का विकास होगा , भारत जैसे देश के लिए यह काफी जरूरी है जो दुनिया में अपनी विकास की गति को तेज करना चाहता है, वैश्विक मंच पर उपस्थिति दर्ज कराना चाहता है।

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